Monday, 14 September 2015
Wednesday, 10 June 2015
God Hanuman gift products from Diviniti
A video with God Hanuman gift options from Diviniti India available for your own house, mandir or for gifting purposes
Tuesday, 9 June 2015
Saturday, 6 June 2015
Friday, 5 June 2015
मां लक्ष्मी मंत्र (Goddess Laxmi )
मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें रक्तचन्दन समर्पण करना चाहिए-
रक्तचन्दनसम्मिश्रं पारिजातसमुद्भवम् |
मया दत्तं महालक्ष्मि चन्दनं प्रतिगृह्यताम् ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः रक्तचन्दनं समर्पयामि |
Maa Lakshmi ki pooja ke dauran is mantra ke dwara unhe raktchandan samarpan karna chahiye-
Raktchandanasammishram Paarijaatasamudbhavam |
Mayaa Dattam Mahalakshmi Chandanam Pratigrihyataam ||
Om Mahalakshmyai Namah Raktchandanam Samarpayaami |
मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें दुर्वा समर्पण करना चाहिए-
क्षीरसागरसम्भते दूर्वां स्वीकुरू सर्वदा ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः दूर्वां समर्पयामि |
Maa Lakshmi ki pooja ke dauran is mantra ke dwara unhe durva samarpan karna chahiye-
Vishnvaadisarvadevaanaam Priyaam Sarvsushobhanaam |
Ksheersaagarasambhate Doorvaam Sveekuroo Sarvadaa ||
Om Mahalakshmyai Namah Doorvaam Samarpayaami |
इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को अक्षत समर्पण करना चाहिए-
अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुंकुमाक्ताः सुशोभिताः |
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरि ||
ॐ महलक्ष्म्यै नमः | अक्षतान समर्पयामि ||
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko akshat samarpan karna chahiye-
Akshataashch Surshreshth Kunkumaaktaah Sushobhitaah |
Mayaa Niveditaa Bhaktyaa Grihaan Parmeshvari ||
Om Mahalakshmyai Namah | Akshtaan Samarpayaami ||
इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को पुष्प माला समर्पण करना चाहिए-
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो |
ॐ मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि |
ॐ महालक्ष्म्यै नमः | पुष्पमालां समर्पयामि ||
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko pushp mala samarpan karna chahiye-
Maalyaadeeni Sugandheeni Maalatyaadeeni Vai Prabho |
Om Manasah Kaamamaakootim Vaachah Satyamasheemahi |
Pashoonaam Roopmannasya Mayi Shrih Shrayataam Yashah ||
Om Mahalakshmyai Namah | Pushpmalaam Samarpayaami |
इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को आभूषण समर्पण करना चाहिए-
रत्नकंकणवैदूर्यमुक्ताहाअरादिकानि च |
सुप्रसन्नेन मनसा दत्तानि स्वीकुरूष्व भोः || ॐ
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् |
अभूतिमसमृद्धि च सर्वां न
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko aabhushan samarpan karna chahiye-
Ratnkankanavaidooryamuktaahaaaraadikani Ch |
Suprasannen Manasaa Dattani Sveekurooshva Bhoh ||
Om Kshutpipaasaamalaam Jyeshthaamalakshmeem Naashayaamyaham |
Abhootimasamriddhi Ch Sarvaam Nirgud Me Grihaat ||
Om Mahalakshmyai Namah | Aabhushan Samarpayaami |
इस मंत्र के द्वारा माता लक्ष्मी को वस्त्र समर्पण करना चाहिए-
दिव्याम्बरं नूतनं हि क्षौमं त्वतिमनोहरम् | दीयमानं मया देवि गृहाण जगदम्बिके ||
ॐ उपैतु मां देवसुखः कीर्तिश्च मणिना सह | प्रादुर्भूतोस्मि राष्ट्रेस्मिन कीर्तिमृद्धि ददातु मे ||<
Is mantra ke dwara Mata Lakshmi ko vastra samarpan karna chahiye-
Divyaambaram Nootanam Hi Kshaumam Tvatimanoharam |
Deeyamaanam Mayaa Devi Grihaan Jagadambike ||
Om Upaitu Maa Devsukhah Keertishcha Maninaa Sah |
Praadurbhootosmi Raashtresmin Keertimriddhi Dadaatu Me ||
Om Mahalakshmyai Namah Vastram Samarpayaami |
इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को स्नान हेतु घी अर्पित करना चाहिए-
ॐ घृतं घृतपावानः पिबत वसां वसापावानः पिबतान्तरिक्षस्य हविरसि स्वाहा |
दिशः प्रदिश आदिशो विदिश उद्धिशो दिग्भ्यः स्वाहा || ॐ महालक्ष्म्यै नमः घृतस्नानं समर्पयामि |
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko snaan hetu ghee arpit karna chahiye-
Om Ghritam Ghritapaavaanah Pibat Vasaam Vasaapaavaanah Pibataantarikshasya Havirasi Svaahaa |
Dishah Pradish Aadisho Vidish Uddhisho Digbhyah Svaahaa ||
Om Mahalakshmyai Namah Ghritsnaanam Samarpayaami |
मां लक्ष्मी की पूजा में इस मंत्र के द्वारा उन्हें जल समर्पण करना चाहिए-
मन्दाकिन्याः समानीतैर्हेमाम्भोरूहवासितैः | स्नानं कुरूष्व देवेशि सलिलैश्च सुगन्धिभिः ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः स्नानं समर्पयामि |
Maa Lakshmi ki pooja me is mantra ke dwara unhen jal samarpan karna chahiye-
Mandaakinyaah Samaaneetairhemaambhoruhavaasitaih |
Snaanam Kurushva Deveshi Salilaishcha Sugandhibhih ||
Om Mahalakshmyai Namah Snaanam Samarpayaami |
इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को आसन समर्पण करना चाहिए-
तप्तकाश्चनवर्णाभं मुक्तामणिविराजितम् | अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम् ||
ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम् | श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ||
ॐ
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ko aasan samarpan karna chahiye-
Taptkaashchanavanaarbham Muktaamaniviraajitam |
Amalam Kamalam Divyamaasanam Pratigrihyataam ||
Om Ashvapurvaam Rathmadhyaam Hastinaadapramodineem |
Shriyam Deveemupahvaye Shrirmaa Devee Jushataam ||
Om Mahalakshmyai Namah | Aasanam Samarpayaami |
इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी का आवाहन करना चाहिए-
सर्वलोकस्य जननीं सर्वसौख्यप्रदायिनीम |
सर्वदेवमयीमीशां देवीमावाहयाम्यहम् ||
ॐ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् | यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ||
Is mantra ke dwara Maa Lakshmi ka aavahan karna chahiye-
Sarvlokasya Jananeem Sarvsaukhyapradaayineem |
Sarvdevmayeemeeshaam Deveemaavaahayaamyaham ||
Om Taam Ma Aavah Jaatavedo Lakshmeemanapagaamineem |
Yasyaam Hiranyam Vindeyam Gaamashvam Purushaanaham ||
Om Mahalakshmyai Namah | Mahalaksheemaavaahayaami, Aavahanaarthe Pushpaani Samarpayaami |
Thursday, 4 June 2015
श्री साईं बाबा व्रत के नियम
श्री साईं बाबा व्रत के नियम
१. ये व्रत कोई भी स्त्री पुरुष और बच्चे भी कर सकते है
२. ये व्रत कोई भी जाती-पति के भेद भावः बिना कोई भी व्यक्ति कर सकता है
३. ये व्रत बहुत ही चमत्कारिक है ९ गुरूवार विधिपूर्वक करने से निश्चित ही इच्छित फल की प्राप्ति होती है
४. ये व्रत कोई भी गुरूवार को साईं बाबा का नाम ले कर शुरू किया जा सकता
५. सुबह या शाम को साईं बाबा के फोटो की पूजा करना किसी आसन पर पीला कपडा बिछा कर उस पर साईं बाबा का फोटो रख कर स्वच्छ पानी से पोछ कर चंदन या कंकु का तिलक लगाना
चाहिये और उन पर पीला फूल या हार चढाना चाहिये अगरबत्ती और दीपक जलाकर साईं व्रत की कथा पढ़ना चाहिये और साईं बाबा का स्मरण करना चाहिये और प्रसाद बाटना चाहिये (प्रसाद में
कोईभी फलाहार या मिठाई बाटी जा सकती है)
६. यह व्रत फलाहार लेकर किया जा सकता है (जैसे दूध, चाय, फल, मिठाई आदि) लेकर अथवा एक समय भोजन करके किया जा सकता है बिलकुल भूखे रहकर उपवास न किया जाय
७. ९ गुरूवार को हो सके तो साईं बाबा के मंदिर जाकर दर्शन किए जाए साईं बाबा के मंदिर न जा पाये तो (नजदीक मंदिर न हो) तो घर पर ही श्रद्धापूर्वक साईं बाबा की पूजा की जा सकती है
८. बहार गाव जाना हो तो भी उस वक्त व्रत चालू रखा जा सकता है
९. व्रत के समय स्त्रियों को मासिक की समस्या आए अथवा किसी कारण से व्रत न हो पाये तो उस गुरूवार को ९ गुरूवार की गिनती में न लिया जाए और उस गुरूवार के बदले अन्य गुरूवार करके
९ वे गुरूवार किया जाए
उद्यापन की विधि
१. ९ वे गुरूवार को उद्यापन करना चाहिए इसमें पांच गरीब को भोजन किया जाए (भोजन अपनी यथाशक्ति देना या करवाना)
२. साईं बाबा की महिमा एवं व्रत का फैलाव करने के लिए अपने सगे-सम्बन्धी या पडोसियों को यह किताबे ५, ११, २१ अपनी यथाशक्ति भेट दी जाए इस तरह व्रत का उद्यापन किया जाय
३. ९ वे गुरूवार को जो किताबे भेट देनी है उसका यथाशक्ति पूजा में रखिए और बाद में ही भेट दी जाए जिससे आपकी एवं अन्य व्यक्तियों की भी मनोकामना पूर्ण हो उपरोक्त विधि से व्रत करने से
एवं विधिपूर्वक उद्यापन करने से निश्चित हो आपकी मनोकामना पूर्ण होगी ऐसा साईं भक्तो का विश्वास है
साईं व्रत कथा
कोकिला बहन और उनके पति महेशभाई शहर में रहते थे दोनों को एक-दुसरे के प्रति प्रेम-भाव था परन्तु महेशभाई का स्वाभाव झगडालू था बोलने की तमीज ही न थी आदोसी-पडोसी उनके
स्वाभाव से परेशान थे, लेकिन कोकिला बहन बहुत ही धार्मिक स्त्री थी, भगवान पर विश्वास रखती एवं बिना कुछ कहे सब कुछ सह लेती धीरे-धीरे उनके पति का धंधा-रोजगार ठप हो गया कुछ भी
कमाई नहीं होती थी महेशभाई अब दिन-भर घर पर ही रहते और अब उन्होंने गलत राह पकड़ ली अब उनका स्वभाव पहले से भी अधिक चिडचिडा हो गया
दोपहर का समय था एक वृद्ध महाराज दरवाजे पर आकार खड़े हो गए चेहरे पर गजब का तेज था और आकर उन्होंने दल-चावल की मांग की कोकिला बहन ने दल-चावल दिये और दोनों हाथों से
उस वृद्ध बाबा को नमस्कार किया, वृद्ध ने कहा साईं सुखी रखे कोकिला बहन ने कहा महाराज सुख कीमत में नहीं है और अपने दुखी जीवन का वर्णन किया
महाराज ने श्री साईं के व्रत के बारे में बताया ९ गुरूवार (फलाहार) या एक समय भोजन करना, हो सके तो बेटा साईं मंदिर जाना, घर पर साईं बाबा की ९ गुरूवार पूजा करना, साईं व्रत करना और
विधि से उद्यापन करना भूखे को भोजन देना, साईं व्रत की किताबे ५, ११, २१ यथाशक्ति लोगों को भेट देना और इस तरह साईं व्रतका फैलाव करना साईबाबा तेरी सभी मनोकामना पूर्ण करता है,
लेकिन साईबाबा पर अटूट श्रद्धा रखना जरुरी है धीरज रखनी चाहिए जो उपरोक्त विधि से व्रत और उद्यापन करेगा साईबाबा उनकी मनोकामना जरुर पूर्ण करेंगे
कोकिला बहन ने भी गुरुर्वार का व्रत लिया ९ वे गुरूवार को गरीबो को भोजन दिया सैव्रत की पुस्तके भेट दी उनके घर से झगडे दूर हुए घर में बहुत ही सुख शांति हो गई, जैसे महेशभाई का स्वाभाव
ही बदल गया हो उनका धंधा-रोजगार फिर से चालू हो गया थोड़े समय में ही सुख समृधि बढ़ गई दोनों पति पत्नी सुखी जीवन बिताने लगे एक दिन कोकिला बहन के जेठ जेठानी सूरत से आए बातो
बातो में उन्होंने बताया के उनके बच्चे पढाई नहीं करते परीक्षा में फ़ेल हो गए है कोकिला बहन ने ९ गुरूवार की महिमा बताई साईं बाबा के भक्ति से बच्चे अच्छी तरह अभ्यास कर पाएँगे लेकिन
इसके लिए साईं बाबा पर विश्वास रखना ज़रूरी है साईं सबको सहायता करते है उनकी जेठानी ने व्रते की विधि बताने के लिए कहा कोकिला बहन ने कहा की ९ गुरूवार फलाहार करके अथवा एक
समय भोजन करके यह व्रत किया जा सकता है और ९ गुरूवार तक हो सके तो साईं मंदिर के दर्शन के लिए जाने को कहा और यह कहा की
- यह व्रत स्त्री, पुरुष या बच्चे कोई भी कर सकते है ९ गुरूवार साईं फोटो की पूजा करना
- फूल चढाना, दीपक, अगरबत्ती अदि करना प्रसाद चढाना एवं साईं बाबा का स्मरण करना आरती करना अदि विधि बताई
- साईं व्रत कथा, साईं स्मरण, साईं चालीसा अदि का पात करना
- ९ वे गुरुवार को गरीबो को भोजन देना
- ९ वे गुरुवार यह साईं व्रत की किताबे अपने सगे-सम्बन्धी, अडोसी-पडोसी को भेट देना
सूरत से उनकी जेठानी का थोड़े दिनों में पत्र आया की उनके बच्चे साईं व्रत करने लगे है और बहुत अच्छे तरह से पढ़ते है उन्होंने भी व्रत किया था और व्रत की किताबे जेठ के ऑफिस में दे थी इस
बारे में उन्होंने लिखा के उनके सहेली की बेटी शादी साईं व्रत करने से बहुत ही अच्छी जगह तै हो गई उनके पडोसी का गहेनो का डब्बा दम हो गया वह महीने के बाद गहनों का डिब्बा न जाने
कोन वापस रख गया एसा अद्भुत चमत्कार हुआ था
कोकिला बहन ने साईं बाबा की महिमा महान है वह जान लिया था
हे साईं बाबा जैसे सभी लोगों पर प्रसन्न होते है, वैसे हम पर भी होना
diviniti.co.in
Tuesday, 2 June 2015
Monday, 1 June 2015
Lord Shiva Mahamrityunjaya Mantra
The Mahamrityunjaya Mantra reads:
In Devanagari script:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।
Word-by-word meaning of the Maha Mrityunjaya Mantra:-
ॐ oṁ = is a sacred/mystical syllable in Sanatan Dharma or hindu religions, i.e. Hinduism, Jainism, Buddhism.[4]
त्र्यम्बकम् tryambakam = the three-eyed one (accusative case),
त्रि + अम्बकम् = tri + ambakam = three + eye
यजामहे yajāmahe = We worship, adore, honour, revere,
सुगन्धिम् sugandhim = sweet smelling, fragrant (accusative case),
पुष्टि puṣṭi = A well-nourished condition, thriving, prosperous, fullness of life,
वर्धनम् vardhanam = One who nourishes, strengthens, causes to increase (in health, wealth, well-being); who gladdens, exhilarates, and restores health; a good gardener,
पुष्टि-वर्धनम् = puṣṭi+vardhanam = पुष्टि: वर्धते अनेन तत् = puṣṭiḥ vardhate anena tat (samas)= The one who nourishes someone else and gives his life fullness.
उर्वारुकमिव urvārukamiva = like the cucumber or melon (in the accusative case),
बन्धनान् bandhanān = "from captivity" {i.e. from the stem of the cucumber} (of the gourd); (the ending is actually long a, then -t, which changes to n/anusvara because of sandhi)
Note: bandhanān means bound down. Thus, read with urvārukam iva, it means 'I am bound down just like a cucumber (to a vine)'.
मृत्योर्मुक्षीय mṛtyormukṣīya = Free, liberate From death
मृत्यु: + मुक्षीय = mṛtyuḥ + mukṣīya= from death + free (Vedic usage)
मा ∫ मृतात् mā ∫ mṛtāt = (give) me immortality, emancipation
Note: Here are two possible combinations
1) मा + अमृतात् = mā + amṛtāt = not + immortality, nectar
Translation would be: (Free me from death but) not from immortality.
2) मा (माम) + अमृतात् = mā (short form of mām) + amṛtāt = myself + sure, definitely
Translation would be: Free me from certain death.
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Thursday, 28 May 2015
Monday, 25 May 2015
Saturday, 23 May 2015
Friday, 22 May 2015
Thursday, 21 May 2015
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